Sunday, March 08, 2009

A Blog's Life.एक ब्लॉग की ज़िन्दगी

BIRTH PANGS (2006-07) जन्म यातनाएं

May 26 2006:
The first post of this blog, containing excerpts from my Jail Diary, The Ballad of Raipur Gaol, is published exactly twenty-six days after I am released on bail. The blog is christened Undertrial.

इस ब्लॉग की पहली पोस्ट, जिसमें मेरी जेल डायरी, "द बैलड ऑफ़ रायपुर जेल" (रायपुर जेल का गाथागीत), के कुछ अंश हैं, का मेरे जमानत पर रिहा होने के ठीक छब्बीस दिन बाद प्रकाशन होता है. ब्लॉग का नामकरण "अन्डरत्रायल" (विचाराधीन) किया जाता है.

November 2 2006:
Hindi makes its first appearance on this blog albeit in a fairly rudimentary form: Hindi posts such as this one are painstakingly composed on Adobe, then converted and published as .jpg images. The outcome is simply not worth the effort as readers have to click on each image to enlarge it in order to make the text readable.

हिंदी की इब्तदा ब्लॉग पर होती है, यद्यपि बेहद मौलिक रूप में: अडोब पर लिखे पोस्ट को .jpg में परिवर्तित करके प्रकाशित किया जाता है; पाठकों को अक्षरों को पढ़ने के लिए अलग-अलग चित्रों पर बार-बार क्लिक करना पड़ता है, जैसे कि इस पोस्ट में. इसलिए महनत के अनुसार फल नहीं मिल पाता.


January 12 2007:
A video of me delivering my first Chhattisgarhi speech is posted. This is the first Chhattisgarhi video on the internet of its kind.

मेरे छत्तीसगढ़ी बोली में दिए गए पहले भाषण के वीडियो को पोस्ट किया जाता है. अपनी तरह का यह इन्टरनेट पर पहला छत्तीसगढ़ी वीडियो है.


April 31-May 1 2007:
During my month-long incarceration, Dr. Saibel Farishta posts on this blog under the nom de plume, Tiger. This is the only time when this blog has two authors. Shortly after my acquittal, the "Tiger Posts" are lost forever when Saibel accidentally (?) deletes them.

इस एक महने जब मैं अचानक फिर जेल में रहा, तब डॉक्टर सैबल फ़रिश्ता इस ब्लॉग पर "टायगर" के नाम से पोस्ट करना जारी रखते हैं. केवल यही समय है जब ब्लॉग के दो लेखक रहते हैं. मेरे बरी होने के कुछ ही समय बाद, सभी "टायगर पोस्ट" हमेशा-हमेशा के लिए तब नष्ट हो जाते है जब सैबल उन्हें गलती से (?) मिटा देते हैं.

October 1 2007:
The first full Hindi post is published using Google Transliterate. The occasion is Mahatma Gandhi's birth anniversary.

सम्पूर्ण रूप से हिंदी की पोस्ट का पहला प्रकाशन होता है, गूगल Transliterate के कारण. अवसर गाँधी जयंती का है.

FIRST RENAISSANCE (2007-08) पहला पुनर्जन्म

December 2 2007:
After my acquittal in May 2007, the title of this blog, Undertrial, loses its meaning. Consequently, the blog is renamed ½FREEDOMS! After a month-long readers-poll, it is given a new look to make room for a variety of new gizmos, which had begun to clutter the lone sidebar: the standard two-column template is replaced with a three-column template by tweaking with Blogger's HTML code. Also, the main color scheme is changed from white-on-black to black-on-white to make the often-lengthy text less stressful to the eyes; and instead of complete texts of each post appearing on the main page, only excerpts are posted with a friendly 'Read More' link.

मई २००७ में मेरे बरी होने के बाद इस ब्लॉग का शीर्षक अपना अर्थ खो बैठता है. "विचाराधीन" की जगह अब इसका नाम "आधी आज़ादियाँ" कर दिया जाता है; साथ ही इसे नई शक्ल भी दी जाती है: नए-नए उपकरणों के लिए जगह बनाने के लिए ब्लोगर के टेम्पलेट के साथ छेड़खानी करके एक के बजाय दो साइडबार निर्मित किये जातें हैं; काले पर सफ़ेद की जगह सफ़ेद पर काले कलर स्कीम को रखा जाता है, ताकि लम्बे पोस्ट पढ़ते हुए पाठकों की आँखों पर जोर न पड़े; और मुख्य पन्ने पर "आगे और पढ़ें" लिंक के साथ केवल पोस्ट के कुछ अंश न की पूरे पोस्ट प्रस्तुत किये जाते हैं.

July 16 2007:
A Disclaimer is posted at the end of the main page. Among other things, it announces this blog's re-commitment to continue with its zero-censorship policy; and forbids publication of its contents without the author's prior consent. The latter part, as is evident from this and other posts, is rarely respected.

ब्लॉग नीति की सूचना ब्लॉग पर मुख्य पृष्ट के अंत में दी जाती है: इसमें ब्लॉग में शुरू से चली आ रही जीरो सेंसरशिप नीति को औपचारिक रूप से घोषित किया जाता है, साथ ही बिना लेखक की पूर्व अनुमति के इसके अंशों के प्रकाशन पर प्रतिबन्ध भी लगाया जाता है. हालांकि इस दुसरे पहलू का कोई गंभीरता से पालन नहीं करता, जैसा कि इस पोस्ट से स्पष्ट हो जाता है.




SECOND RENAISSANCE (2009) दूसरा पुनर्जन्म

January 21 2009:
A separate Hindi blog on the politics of Chhattisgarh, छ्त्तीसगढ़िया सबले बढ़िया!, is started.

छत्तीसगढ़ की राजनीति पर हिंदी में एक अलग ब्लॉग, छ्त्तीसगढ़िया सबले बढ़िया!, की स्थापना होती है.


February 13 2009:
Following an Indian Express feature on this blog, in which it was mistakenly referred to as ½FREEDOM!, the name of the blog is changed for a second time to correspond to that error. The 's' is dropped from its name. The reason: although there are several kinds of freedoms, I realize that both its presence and absence are experienced as a unified whole.

इंडियन एक्सप्रेस में इस ब्लॉग के बारे में एक खबर, जिसमें इसका नाम गलती से आधी आज़ादी लिख दिया जाता है, के प्रकाशन के बाद उस गलती को ठीक साबित करने के लिए इसका दूसरा नामकरण होता है: 'याँ' को हटा दिया जाता है. कारण: हालांकि आज़ादी के कई प्रकार होते हैं, पर जब उसे और उसके अभाव, दोनों को महसूस किया जाता है, तो मुझे अहसास हुआ की वो सब एक ही लगते हैं.


March 1 2009:
Google's Friends Connect feature is added, making it possible for me to keep in touch with my friends- and critics- over this blog.

गूगल के फ्रेंड्स कनेक्ट उपकरण का ब्लॉग पर आगमन होता है, इस उम्मीद के साथ कि सखा और समालोचक, दोनों अब ब्लॉग के जरिए मेरे, और एक दुसरे के भी, संपर्क में बने रहेंगे.

March 5 2009:
½FREEDOM! finally makes its second rebirth with a new minimalist look. Only the bare essentials are retained in the two sidebars; the rest of the features appear as links in the header. Also, it becomes more Hindi-friendly.

ब्लॉग के दुसरे पुनर्जन्म की कड़ी समाप्त होती है, एक न्यूनतम शक्ल के साथ. सिर्फ बेहद जरूरी उपकरणों को ही साइडबार में बकाया रखा जाता है; बाकी सब हेडर में लिंक के रूप में दिखाई देते हैं. साथ ही, इसे और अधिक हिन्दी के अनुकूल बनाया जाता है.


(हिंदी में अनुवादित ये संक्षिप्त इतिहास इस बात का गवाह है!)

3 comments (टिप्पणी):

sameer said...

समय समय पर ब्लॉग पर हुए बदलाव के बारे में क्रमवार जानकारी के लिए शुक्रिया .....विशेषकर ब्लॉग के नए सखाओ के लिए अत्यंत उपयोगी है ...आभार आपका ..............समीर.

Anonymous said...

johaar jogi ji,
bane bane havas na? sunat han te ha hamar dahar le chunai lade bar javat has ga, aa na bhaiya kaay kar lebo ham garib aadmi man ha, manaa kare le tai haa manbe thode ga.

vaise ek bat tau bata ga, kono kahat rahis he ki tai ha khud apan blog la nai likhas, kahithe ki kono delhi wale aadmi la paisa de ke likhwathas tai ha, bhagwan janay re bhaiya bade aadmi man ke bade-bade bat.

johar le

Dr Saibel Farishta said...

It is a delight to visit Mr Amit Jogi's Blog. Whenever I visit here I always learn some new thing for sure. I also thank him for allowing me to manage his superb blog briefly for a month. Regards - Saibel

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